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स्वर्ण हँस 🦢 की हिन्दी कहानी- Hindi Kahaniya

स्वर्ण हँस की हिन्दी कहानी

 एक बार एक पंडित और उसकी पत्नी गाँव मे रहते थे, वे एक छोटे से घर 🏠 मे एक नदी किनारे रहते थे, वे बहुत गरीब थे और जीवन यापन करने के लिए बहुत संघर्ष करते थे। पंडित अपनी पत्नी को कई शुख-भोग देकर खुश करना चाहते थे। एक दिन पंडित, झील के किनारे बैठे थे, जब उसकी पत्नी रसोई मे काम कर रही थी, पंडित शांति पूर्ण दोपहर मे कुछ प्रार्थना कर रहे थे, जब उसने अपने आंखे खोली तो देखा की, एक सुंदर शुनहरे रंग की हंस 🦢 उसके तरफ आ रहा है, हँस के पास कई चमकीले सुनहरे पंख थे, जो बहुत सुंदर थे। हंस नदी किनारे चला गया और पंडित का विवादन किया "हे पंडित मैंने देखा है, की तुम और तुम्हारी पत्नी बहुत कठिन जिंदगी जीते हो" मै तुम जैसे अच्छे लोगों की मदद करना चाहता हूँ | पंडित के कहा "तुम बहुत अच्छे हो मेरे दोस्त, भगवान ने हमारी सुन ली", तुम्हारे पंख कितने सुंदर है क्या ये असली सोने के है?| हँस के कहा "जी हाँ ये असली सोने के है", मै एक-एक सुनहसरे पंख देकर तुम्हारी मदद करना चाहती हूँ, और आप उन्हे बेच सकते है, और उनके द्वारा जुटाए गए पैसों से आप लोग आसानी से आराम से रह सकते है | 

    
पंडित ने कहा - यह एक अद्भुत है कृप्या आप हमारे नम्र घर मे आये और हमारे साथ रहे, मुझे यकीन है मेरी पत्नी तुम से मिलकर बहोत प्रसन्न होगी | पंडित हंस को अपने साथ घर ले आए और अपनी पत्नी को दिखाया, उसकी पत्नी हैरान थी और अपने जीवन मे कुछ सुख भोग पाकर बहोत खुश थी | पत्नी ने तुरंत पूछा "क्या आप अपना एक पंख अभी दे सकते है"?, ताकि हम इसे देख सके और इसे धारण कर सके | हँस 🦢 ने कहा "हाँ जरूर"- हंस ने एक पंख निकाला और उसे पंडित की पत्नी को दे दिया, फिर उसने कहा- इसे एक बार मे एक से अधिक ना ले क्योंकि यह सही नहीं होगा | हंस, पंडित और उसकी पत्नी के साथ रहने लगा, हर दिन वह एक पंख दिया और इस परेशानी के दिनों मे बहुत मदद की। 

हंस 🦢 चारों ओर उड़ता और यह देखना एक हसीन नाजारा था, पंडित और उसकी पत्नी बहुत  खुश थे और उन्होंने पैसों की लिए पंख बेचना शुरू कर दिया था । एक सुनहरे पंख ने उन्हे पर्याप्त पैसा दिया | पंडित अपनी पत्नी को हमेशा यह याद दिलाता था की , वो इस उपहार को पाकर बहुत भाग्यशाली है, और उन्हे इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए | 

कई दिन बित गए और एक दिन पंडित पंख बेचने के लिए बाजार गया, पत्नी घर मे खाना बना रही थी, जबकि स्वर्ण हंस 🦢 कोने मे सोया हुआ था । अचानक पंडित की पत्नी को एक विचार आया, ये हंस कब तक हमारे साथ रहेगा हमे तो बस इसके पंखों से मतलब है, और इस प्रक्रिया मे हमे इसे- खिलाना है, नहेलाना है, और इसकी देख-भाल करना है, हम इस हंस 🦢 पर भरोसा नहीं कर सकते, ये तो यंहा से दूर भी जा सकता है, और कभी वापस नहीं आया तो हम फिर से गरीब हो जाएंगे । यदि मै सारा पंख निकाल लू तो क्या बुरा होगा, उसके सोते हुए मै उसका सारा पंख निकाल लूँगी, हमे जीवन मे कभी एक भी काम नहीं करना पड़ेगा, हम पंखों को सुरक्षित रूप से संभाल कर रख सकते है, और जब मन चाहे इस्तेमाल भी कर सकते है। 
 
पत्नी धीरे-धीरे हंस 🦢 के पास गई, और उसे पकड़ लिया, हंस भयभीत हो गया, पत्नी उसकी पंख खिचने की कोशिश करने लगी, और हंस खुद को मुक्त करने के लिए संघर्ष करने लगी। पंडित की पत्नी ने कहा "मुझे तुम्हारे हाल की फिक्र नहीं है, मै तुम्हारे सभी पंख मिलने तक का इंतेजार नहीं कर सकती"। हँस ने काहा "अरे तुम ऐसा क्यों कर रही हो मूर्ख औरत, मै तुम्हारे और तुम्हारे परिवार की दुख दूर करने की कोशिश कर रही थी", तुम एक लालची महिला हो और जीवन की सुख भोग के लायक नहीं हो, क्योंकि तुम इसका दुरुपयोग करोगी ,तुम्हारे पति तुम्हारे लिए सबसे अच्छा चाहते है, लेकिन तुम अपना औसर खो चुकी हो, मेरी इच्छा के अनुसार तुम्हें स्वर्ण पंख देता रहा, लेकिन तुम्हारी मदद करने की कोई जरूरत नही, अब मेरे पंख तुम्हारे लिए एक पक्षी  के पंख से ज्यादा कुछ नहीं है, मै इस जगह से जा रहा हु, और कभी वापस नहीं आऊँगा |
हंस 🦢 ने वहाँ से जाने के लिए संघर्ष कीया और पंडित की पत्नी को जोर से चोंच मारी, और खिड़की से बाहर उड़ गया | पंडित बस घर मे घुसा ही था, जब उसने हंस को उड़ते देखा, "तुमने हँस के साथ क्या किया"| जी मुझे उसकी सारी पंख चाहिए थे, और ओ मुझे लेने नहीं दे रहा था | मैंने तुम्हें ना लेने के लिए कितनी बार कहा, तुमने सब कुछ बर्बाद कर दिया | अब हम बाकी के जीवन जीने के लिए फिर से गरीब हो जाएंगे |           

सीख = इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है, की अतिरिक्त लालच से हमे कुछ भी हासिल नहीं होता ।  

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