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बगुले 🦢 की हिन्दी कहानी Bagule Ki Kahani

बगुले की हिन्दी कहानियाँ

बगुला उड़ गया

      जापान मे एक साधारण चरवाहा था|उसका नाम था मूसाई| एक दिन वह गाये 🐄🐄 चरा रहा था|एक बगुला 🦢 उड़ता आया और उसके पैरों के पास गिर पड़ा|मूसाई ने बगुले को उठा लिया|संभवतः बाज 🦅 ने बगुले को घायल कर दिया था|उजले पंखों पर रक्त के लाल-लाल बिन्दु थे|बेचारा पक्षी 🦢 बार-बार मुख फाड़ राहा था|मूसाई ने प्यार से उस पर हाथ फेरा|जल के समीप ले जाकर उसके पंख धोए|थोड़ा जल चोंच मे भी डाल दिया|पक्षी 🦢मे साहस आया|थोड़ी देर मे वह उड़ गया|इसके थोड़े दिन बाद एक सुंदर धनवान लड़की ने मूसाई के माता से प्रार्थना की और उससे मूसाई का विवाह हो गया|
       मूसाई बहुत प्रसन्न 
😃था,उसकी स्त्री 👩 बहुत भली थी|वह मूसाई और उसकी माता की बहुत मन लगाकर सेवा करती थी|वह घर का सब काम अपने- आप कर लेती थी|मूसाई की माता तो अपने बेटे की स्त्री की गाँव भर मे प्रशंसा ही करती फिरती थी|उसे घर के किसी भी काम मे तनिक भी हाथ नहीं लगाना पड़ता था|

      भाग्य की बात – देश मे अकाल पड़ा|खेतों मे कुछ हुआ नहीं|मूसाई मजदूरी की खोज मे माता तथा स्त्री 👩 के साथ टोकियो नगर मे आया|मजदूरी कहाँ जल्दी मिलती है ? मूसाई के पास के पैसे खर्च हो गए थे|उसको उपवास करना पड़ा|तब उसकी स्त्री ने कहा – ‘मै मलमल बना दूँगी|तुम बेच लेना|लेकिन जब मै मलमल बूनू तो मेरे कमरे मे कोई ना आवे|’

       मूसाई की समझ मे कोई बात नहीं आयी|वह नहीं जनता था की उसकी स्त्री 👩मलमल कैसे बनाएगी?लेकिन मूसाई सीधा था|उसे अपनी स्त्री पर पूरा विश्वास था|उसकी स्त्री ने पहले कभी झुट नहीं कहा था|फिर पास मे पैसे थे नहीं | किसी प्रकार कोई पैसे मिलने का रास्ता निकले तो घर का काम चले |
       
मूसाई स्त्री👩की बात चुप-चाप मान ली|स्त्री 👩जब उससे कुछ मांगती नहीं तो उसकी बात मान लेने मे हानी भी क्या थी|उसने अपनी माता से कह दिया की जब उसकी स्त्री अपना कमरा बंद कर ले तो कोई उसे पुकारे नहीं और ना उसके कमरे मे भी जाए दूध के समान उजला मलमल और उस पर छोटे-छोटे लाल छीटे – मूसाई की स्त्री ने जो मलमल बनाई वह अद्भुत थी|रेशम के समान चमकती थी 🔆 | बहुत कोमल थी|जब मूसाई उसे बेचने गया तो खुद राजा मिकाडो ने मलमल खरीदी | मूसाई को सोने की मुहरे मिली|अब तो मूसाई धनी हो गया|उसकी स्त्री मलमल बनाती और वह बेच लाता|
        एक दिन मूसाई ने सोचा –‘मेरी स्त्री ना रुई लेती है, न रंग | वह मलमल कैसे बनाती है ?’

        मूसाई छिपकर खिड़की से देखने गया, जब स्त्री ने मलमल बनाने का कमरा बंद कर लिया था | मूसाई ने देखा की भीतर स्त्री नहीं है|एक उजला बगुला बैठा है | वह अपने पंख से पतला तार नोचता है और पंजों से मलमल बुनता है |उसके गले मे घाव है | घाव का रक्त वह पंजेसे वस्त्र पर छिड़ककर छीटे डालता है |मूसाई ने समझ लिया की वही बगुला स्त्री बना है और उपकार का बदला दे रहा है |
        मूसाई को बाडा आश्चर्य हुआ | एक छोटे बगुले ने उपकार का ऐसा बदला दिया है; यह सोंचकर उसका हृदय भर आया | उसकी आँखों मे आँसू आ गये | वह जहा – का – तह हद रह गया | वह उस बात को भूल गई की उसकी स्त्री ने मना किया है की मलमल बुनते समय कोई उसे देखने ना आवे | उसे तो यह भी याद ना रहा की वह यह क्यों खड़ा है|इसी समय मूसाई की माता ने पुकारा | मूसाई बोल पड़ा | बगुला चौंका और खिड़की से उड़
🕊️ गया.
 जो जीवों पर दया करता है, उसे अवश्य बड़ा लाभ होता है|        

source-चोखी कहानियाँ

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